हजारों लोगों को राशन मुहैय्या करा चुकी है ‘नुसरत’ बिना नाश्ते के निकल पड़ती है शहर में

दिल्ली में एक जगह है खजूरी, यहाँ की जाकिर हुसैन कॉलेज की एक स्टूडेंट है,  नुसरत परवीन, ये वो काम कर रहीं हैं जो सरकार को करना चाहिए, लोकडाउन के चलते जब देश में हाहाकार मची है, नुसरत घर घर जाकर भूखे लोगों को राशन बाँट रही है।

जैसे ही देश में लोक डाउन हुआ इस लड़की ने अपनी सामर्थ्यता को बढ़ा दिया, इससे पहले ये लड़की दिल्ली दंगे में पीड़ित लोगों की मदद कर रही थी, लेकिन लोकडॉउन होते ही दंगा प्रभावित लोगों पर दोहरी मार पड़ गयी थी, दुनिया भर ने राशन इकट्ठा किया लेकिन यहाँ धारा 144 पहले से ही लगी थी।

दिल्ली दंगो के समय से ही कर रही है मदद

महीने भर पुरानी ही तो बात है, दिल्ली में दंगे हुए थे, खजूरी में बब्बू नाम के युवक की लाश मिली थी, सड़क पे, बब्बू बहुत गरीब था, किराए का कमरा लेकर फॅमिली के साथ रहता था, दिनभर ऑटो चलाकर जैसे तैसे पेट पाल रहा था, अपने परिवार का इकलौता सहारा था, फिर दंगे में उस परिवार के सहारे को नफरतपसन्द ताकतों ने उसे छीन लिया।

परिवार का बुरा हाल हो गया, अब क्या होगा? ऐसे में नुसरत उनके लिए फरिश्ता बनके आयी, उसने अपने कुछ फेसबुक दोस्तों को पूरी कहानी बताईँ, उसके दोस्तों ने एक रकम इकट्ठा करी, लगभग 50 हजार रूपये, उन्होंने एक दिन में इकट्ठे कर लिए, नुसरत ने वो रकम बब्बू के घर पहुंचाई।

अगले दिन नुसरत को पता चला कि सी.पी.आई.एम. पार्टी पीड़ितों को एक लाख रूपये दे रही है तो उसने एक लंबी भागदौड़ करके आखिरकार कुछ कार्यकर्ताओं को लेकर मृतक बब्बू के घर पहुंची, CPIM कार्यकर्ताओं ने बब्बू की पत्नी को एक लाख रूपये की मदद की। इसके बाद नुसरत ने सी.पी.एम. पार्टी को 16 और परिवारों की लिस्ट भेजी अब तक सी.पी.आई.एम. द्वारा 62 परिवारों को एक एक लाख रूपये के चेक दे दिए गए हैं।

हमने इस बारे में नुसरत से बात की, हमने नुसरत से पूछ कि इतना बड़ा काम कर रही हो तो घरवालों का कैसा रिएक्शन है? नुसरत बताती हैं कि दंगे से पहले ही अम्मी गाँव में थी, धारा 144 लगी तो वहीँ फंस गई, मैं और मेरी दो छोटी बहन ही यहाँ है, लेकिन सबलोग फोन बहुत होंसला अफ़ज़ाई करते हैं, और साथ देते हैं, दंगे के वक्त ज़रा डर लगता था लेकिन छोटी बहन बहुत बहादुर है, उसने कराटे सीखे हुए है, हमने मिलकर लोगों की मदद की और अभी भी कर रहे हैं। इस मामले में मैं अपने पिता मोहम्मद आबिद और अम्मी मरजीना खातून की बेहद शुक्रगुजार हूं  उन्होंने मुझे इस काबिल बनाया कि ये सब कर पा रही हूँ”

सवाल- कैसा लगता है मदद करके?

जवाब- बहुत अच्छा लगता है, दिल को सुकून मिल जाए इससे बेहतर क्या बात होती है, कभी कभी जब भूख से तड़पते बच्चों को अपनी आँखों के सामने चुप होकर सोते हुए देखती हूँ तो आँखे भर आती हैं, हालात बहुत ज्यादा बुरे हैं। इतने ज्यादा बुरे की सुबह से ही फोन बजने लगता है, मैं बिना नाश्ते के ही निकल पड़ती हूँ, आज सुबह से पूरे दिन में एक लोकडाउन प्रभावित के घर में चाय पी है, जबकि इस वक्त रात के 10 बज रहें हैं। लोगों के भूखे चेहरे देखकर मुझे खुद भूख नहीं लग रही।

 

सवाल- तो कैसा महसूस हुआ, किसी का रोता हुआ बच्चा जब तुंहारी वजह से चुप हो गया?

जवाब- एक फेसबुक दोस्त ने रात के 11 बजे फोन किया, और परिवार का कॉन्टेक्ट नम्बर दिया, पता चला आज पूरे दिन उसके घर में खाना नही पका, मैं उसी वक़्त वहां राशन लेकर पहुंची, उन लोगों ने बहुत दुआ दी, ऐसा कई बार होता है, जब कोई दुआ देता है तो लगता है हम दुनिया से सबसे अमीर हैं।

सवाल- सरकार और लोगों के नाम कोई संदेश?

जवाब- सरकार से इतना ही कहना चाहूंगी कि बिना किसी पूर्व योजना के जो लोकडाउन किया है ये गरीब ही नहीं अमीर लोगों को भी भूख से मार डालेगा, सरकार कमसे कम लोगो तक राशन तो पहुंचा ही सकती है।

और लोगों से यही कहना चाहती हूँ कि कृपया घरो में रहें, लोकडाउन का पालन करें, अपने पड़ोसी का ध्यान रखें तो कोई भूखा नही सोयेगा, और सबसे बड़ी बात ये कि जिन लोगों के पास राशन पहले से मौजूद है वो राशन जमा न करें, बल्कि उन लोगों को लेने दें जिनके पास राशन नहीं है। सब्र से काम लें, ये बहुत कठिन दौर है, और हर बुरे दौर के बाद एक नया सवेरा होता है। ये वक़्त भी यूँ ही बीत जाएगा।

नुसरत ने बताया कि अब वह कुछ और लोगों के साथ जुड़ गई है, जो कि CPIM कार्यकर्ता हैं, जो इस नेक काम में उनकी मदद कर रहे हैं, मिर्ज़ा मेहँदी रज़ा, अनुराग सर और अमन सर

अगर आप नुसरत से जुड़ना चाहते हैं, उनकी मदद करना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करके उनको मैसेज कर सकते हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.