अभी अभी – राम मंदिर निर्माण को लेे कर फिर शुरु हुआ वि’वाद

अयोध्या में राम मंदिर शिलान्यास समारोह से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया है। ट्विटर पर ऑल इंडिया मु’स्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से कहा गया कि “दिल तोड़ने की कोई जरूरत नहीं है”।ऑल इंडिया मु’स्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्वीटर पर लिखा, “#BabriMasjid थी और हमेशा एक मस्जिद होगी। #HagiaSophia हमारे लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टिकरण निर्णय द्वारा भूमि काu दायर की थी। कोर्ट ने केंद्र सरकार को अयोध्या में एक म’स्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का भी निर्देश दिया था। AIMPLB ने कहा कि वह वैकल्पिक पांच एकड़ जमीन को स्वीकार नहीं करेगा। जमीयत उलमा-ए-हिंद (JUH) ने कहा था कि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का विरोध किया।

AIMPLB इस मामले में पक्षकार नहीं था, लेकिन तीन मुकदमों में आरोपी था। अयोध्या शहर के निवासी मोहम्मद उमर खालिद, अयोध्या जिले के रहने वाले मिस्बाहुद्दीन और अंबेडकरनगर जिले के टांडा शहर के निवासी महफूजुर रहमान ने फैसले में समीक्षा याचिका दायर की थी। हालांकि, सभी समीक्षा याचिकाओं को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था।
136 साल पुराने अयोध्या विवाद में 6 दिसंबर, 1992 को सां’प्रदायिक तनाव उस समय बढ़ा गया था, जब एक भीड़ ने बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया। बाबरी के ध्व’स्त होने के बाद देश में कई जगहों पर दंगे हुए, जिसमें कम से कम 2,000 लोगों की मौ’त हुइ्र। हिंदु’ओं का मानना है कि अयोध्‍या स्थल भगवान राम की जन्मभूमि है, और 16वीं शताब्दी में इसके ऊपर मस्जिद बनाई गई थी।

2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निर्मोही अखाड़ा, राम लल्ला और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को समान रूप से भूमि वितरित करने का आदेश दिया। लेकिन भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट के पांच-न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए इस भूमि को रामलला को दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को साइट के प्रबंधन और मंदिर के निर्माण की देखरेख करने के लिए एक ट्रस्ट स्थापित करने का आदेश दिया और म’स्जिद के लिए वैकल्पिक स्थल पर पांच एकड़ जमीन दी।

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