बिहार में मजलिस की बढ़ती कामयाबी को देखते हुऐ दूसरी पार्टी बड़ी चिंता में लग रही है

प्रभातवार्ता डेस्क : बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन जहां एकजुटता दिखाने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बिहार की राजनीति में  असदुद्दीन ओवैसी की इंट्री से सियासत गरमा गई है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) ने मुस्लिम बहुल 50 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ने का ऐलान करके महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी है. पार्टी ने 8 सीटों की सूची जारी कर दी. इसके पहले वह 32 सीटों पर की सूची जारी कर चुका है.

AIMIM पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने प्रेस वार्ता में बताया कि ये 50 सीटें चिन्हित कर ली गई हैं. उम्मीदवारों का चयन बाद में होगा . भाजपा और जदयू के खिलाफ समान विचारधारा की पार्टियों से भी सीटों के तालमेल के संबंध में बातचीत जारी है. गैर एनडीए दलों की यह जिम्मेदारी है कि वे मजबूत विकल्प पेश करें. आरोप लगाया कि सरकार से लोग निराश हैं. विकास नहीं होने से मजदूर भारी संख्या में वापस जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि दूसरी सूची सूची में कोचाधामन, किशनगंज, बहादुरगंज, ठाकुरगंज, नरपतगंज, अररिया, कस्बा, छातापुर, प्राणपुर, जाले, दरभंगा शहर, भागलपुर, गया और पूर्णिया शामिल हैं. पार्टी की इच्छा है कि गैर एनडीए दलों के साथ बिहार में मजबूत मोर्चा बनाया जाए पार्टी इसके प्रयास में लगी है.

बता दें कि ओवैसी की पार्टी की बिहार में अति सक्रियता से महागठबंधन के परेशान होने के कई कारण भी हैं. AIMIM ने जिन सीटों को अपनी सूची में शामिल किया है, उनमें फिलहाल आधे से अधिक पर महागठबंधन के घटक दलों का कब्जा है. पिछले चुनाव के मुताबिक कुल 50 सीटों में से 30 पर अभी राजद, कांग्रेस और माले के विधायक हैं. एक तिहाई सीटों पर तो अकेले राजद का कब्जा है, जबकि 11 सीटें कांग्रेस के खाते में हैं.

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