मुस्लिम गार्ड पर आरोप लगाकर साहब कोरोना से चल बसे, गार्ड निगेटिव निकला

NDTV लिख रहा है कि ‘निजामुद्दीन मरकज मस्जिद में हुआ तबलीगी जमात का कार्यक्रम भारत में कोरोनावायरस का केंद्र साबित हुआ है.’ ऐसी ‘निष्पक्षता’ और कहां देखने को मिलेगी? भारत में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी को सामने आया था। लाॅकडाउन होने के महीनों पहले राहुल गांधी ने कोरोना को लेकर चेताया था, लेकिन तब सरकार और मीडिया के बौद्धिक आतंकियों द्वारा राहुल का मजाक उडाया गया था।

 

लेकिन जब हर एक नाकामी का ठीकरा फोड़ने के लिए मुसलमान का सर मिला हुआ है तब तमाम तथ्य, आंकड़े, बेमायने हो जाते हैं। मैंने पहले भी कहा था कि NDTV से रवीश कुमार को अलग रखकर देखिए वह बिल्कुल वैसा ही दिखेगा जैसे बाकी चैनल दिखते हैं। बहरहाल कोरोना एक महमारी है जो किसी को भी अपने चपेट में ले सकती है।

राशन वितरण के लिए तैयार करते कुछ मुस्लिम्स

फिर वह हिन्दू हो या मुसलमान, नास्तिक हो धार्मिक कोई भी इस बीमारी की चपेट मे आ सकता है। दिल्ली की डिफेंस काॅलोनी में एक ‘साब’ ने अपने गरीब मजदूर गार्ड पर कोरोना फैलाने का आरोप लगाकर उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वह ‘नौकर’ तो निगेटिव पाया गया लेकिन अब उसके साब इस दुनिया में नहीं हैं जिन्हें वह बता सके कि इस बीमारी के फैलने मे उसका कोई कसूर नही है। अगर उस ‘नौकर’ का नाम भी ‘साब’ के नाम से मिलता जुलता हुआ होता तब भी क्या इस गरीब आदमी पर मुकदमा दर्ज होता?

लेकिन मीडिया के प्रोपेगेंडा युद्ध ने न सिर्फ आम इंसानों बल्कि ‘साब’ लोगों की सोचने समझने की ताक़त को सीमित कर दिया है। इसका जीता जागता उदाहरण यह घटना है। साब ने अपने ही नौकर पर आरोप लगा दिया कि उनका सिक्योरिटी गार्ड तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुआ था, और उसने कोरोना फैलाया है।

 

इन आरोपों के बाद साब को परिवार समेत साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य की कोरोना से मृत्यु हो गई और उनके बेटे वेंटिलेटर पर हैं। व्यक्ति की पत्नी ठीक हो चुकी है और उसको डिस्चार्ज कर दिया गया है। नौकर गरीब था ऊपर से उसके उस पर कोरोना फैलाने के आरोप में मुकदमा भी दर्ज किया गया था, जिसके बाद वह अपने कमरे पर ही क्वाॅरेंटाइन हो गया। उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है, लेकिन उस ग़रीब पर आरोप लगाने वाला उसका ‘मालिक’ चल बसा….
Wasim Akram Tyagi (लेखक पत्रकार हैं )

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