डॉ रोशन शेख ने 16 वर्ष की उमर दोनों पैर ट्रेन एक्सीडेंट में खो दिए- फिर बनी MBBS-MD

मुंबई : 16 साल की उमर मे जिस के दोनो पैर ट्रेन से कट जाते है वो M.B.B.S.और MD तक का सफर कैसे तय करती है खुद उस की ज़बानी सुने …डॉ रोशन शेख ने बताया कि बहुत ज्यादा शुक्र गुजार हूँ भारत विकास प्रधिकरण की और अन्य उन सभी लोगो की जिन्होंने ऐसे मंच पर आने ओर लोगो को मोटिवेट करने का मौका दिया । उन्होंने बताया कि डॉ अनिल सर जितना मोटिवेशनल मैने किसी और को नही पाया – वो हमेशा हिम्मत दिलाते रँहे हैं । मै उनकी बहुत शुक्रगुज़ार हूँ इन सभी चीजों के लिए ।
सलाम ऐसे हौसले और जज़बे को .

डॉ रोशन बताती हैं कि 2008 में मैने दसवीं पास की थी और टॉप नंबरों से 92.15% पूरे जोगेश्वरी में और मेरा एक सपना था कि मैं डॉक्टर बन लोगो की सेवा करू । डॉक्टर रोशन बताती हैं कि मैं मिडिल क्लास से ताल्लुक रखती हूं मेरे पिता सब्जी विक्रेता है । और घर पर हमेशा आर्थिक परेशानी देखी । मैने घर की स्पोर्ट और लोगो की सेवा का मन बनाया और कॉलिज में एडमिशन लिया। मेरा कॉलिज बेन्द्रा मे है और घर जोगेश्वरी में इसलिए में रोजाना लोकल ट्रेन से कॉलिज जाती थी ।

डॉ रोशन शेख बताती है कि 7 अक्टूबर 2008 को जब में कॉलिज से घर वापिस आ रही थी । मेरे कॉलिज सेमेस्टर चल रहे थे और सुबह 10 बजे का वक्त था । उस समय सुबह 10 बजे आस पास लोकल ट्रेन में बहुत ज्यादा भी’ड़ होती है । ट्रेन से उतरते वक्त वो ट्रेन के नी’चे आ जाती हैं और अपने दोनों पैर खो देती है । वो लोगो से मदद की गुहार लगाती हैं उस वक्त तकरीबन आधे घण्टे उनकी कोई मदद नही करता है । वो जख्मी हालत में लोगो को अपने घर का नम्बर देती है पर न कोई मदद न कोई उनके घर पर कोई फोन भी नही करता जबकि वँहा लोगो की भी’ड़ तमाशा देख रही होती है । बाद में रेलवे के लोग उनको हास्पिटल पोहुँचाते है ।

सरकारी अस्पताल में भी उनका शाम 6 बजे तक कोई इलाज नही हो पाता है बाद में परिवार के लोग उनको प्राइवेट अस्पताल ले जाते है और उनका ईलाज हो पाता है । सिर्फ 16 साल की उमर में अपने दोनों पैर खो देने के बाद उनको मानसिक और शारीरिक तंज भी सुनने को मिले । लोग नकारात्मक टिप्पणी करते थे । लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था । आर्थिक और सामाजिक सब तरह की परेशानी देख कर हमेशा अपने परिवार के लिए दुआए की अपने अ’ल्ला’ह से ।

(देखिए वीडियो)

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