कोरोना के इलाज का फर्जी दावा करने पर अदालत ने बाबा रामदेव की कंपनी पर लगाया 10 लाख का जुर्माना!

दो दिन पहले ही बाबा रामदेव ने दावा किया था कि उनकी कोरोना ठीक करने वाली दवा कोरो’निल की इतनी मांग है कि वो मांग को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ इस दवा का फर्जीवाड़ा अब पूरी तरह सामने आ चुका है. मद्रास हाई कोर्ट ने बाबा रा’मदेव की कम्प’नी पर बड़ा एक्शन लिया है.

को’रोना वायरस ठीक करने के दावे की पोल इस हद तक खुल चुकी है कि मद्रास हाई कोर्ट ने रामदेव की कंपनी पतं’जलि आ’युर्वेद पर 10 लाख रुपये का जुर्मा’ना लगा दिया है. यह जुर्माना उस दावे के लिए लगाया गया है जिसमें कहा गया है कि प’तंजलि आयुर्वेद द्वारा तैयार की गई दवा कोरो’निल कोविड-19 (COVID-19) को ठीक कर सकता है.

अदा’लत ने कहा कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए आम जनता में ड’र और द’हशत का फायदा उठाकर मुनाफे के लिए इसका इस्तेमाल किया गया है.

बता दें कि इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट ने कोरोना वा’यरस के इलाज को लेकर पेश की गई कोरो’निल दवा के ट्रेड’मार्क के इस्ते’माल पर भी रोक लगा दी थी.

चेन्नई की कंपनी अरुद्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड की याचिका पर पिछले महीने यह अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि उसने औद्योगिक उपयोग के लिए ट्रेडमार्क नियमों के अनुसार ‘कोरोनिल -92 बी’ रजिस्टर्ड किया था.

कंपनी ने कहा कि जून 1993 में इसके रजिस्ट्री करने के बावजूद, पतंजलि ने कोरोना महामारी के मद्देनजर अपने ‘इम्युनिटी बूस्टर’ के लिए इस नाम का इस्तेमाल किया.

कंपनी के मुताबिक 2027 तक उनका इस ट्रेडमार्क पर अधिकार है. हाईकोर्ट ने कहा कि पतंजलि को अपने उत्पाद बेचने से पहले ट्रेडमार्क रजिस्ट्री में जाकर देखना चाहिए था कि ये ट्रेडमार्क रजिस्टर्ड है या नहीं.

कोर्ट ने पतंजलि को कहा कि वो चेन्नई स्थित अदयार कैंसर इंस्टीट्यूट और गवर्नमेंट योग एंड नेचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल को 5-5 लाख रुपये दे.

बता दें कि पतंजलि ने कोरोनिल को कोरोना की दवा के रूप में लॉन्च किया था. लेकिन जब इस दवा की पोल खुल गई और आयुष मंत्रालय ने इसे कोरोना की दवा के तौर पर बेचने पर पाबंदी लगा दी, तबसे कंपनी इसे इम्यूनिटी बुस्टर के रूप में बेच रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.