शाहीन बाग में वीडियो बनाती बु’र्के में पक’ड़ी गईं गुंजा कपूर, नरेंद्र मोदी भी करते हैं ट्विटर पर फॉलो

‘दिल्ली के शाहीन बाग में पुलिस ने 5 फरवरी के दिन एक महिला को प्रदर्शन कारियों के बीच से बाहर निकाल दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये महिला बुर्का पहनकर शाहीन बाग पहुंची थीं और वीडियो रिकॉर्ड कर रही थीं. अपना नाम बरखा बता रही थीं, जो कि उनका असली नाम नहीं है. प्रदर्शन कारियों को महिला पर तब शक हुआ, जब वो कई सारे सवाल पूछने लगीं.

वहां मौजूद लोगों ने देखा कि उनके हाथ में मौजूद मोबाइल में कैमरा भी चालू है. इसके बाद लोगों को महिला की पहचान को लेकर शक हुआ. उन्हें पकड़ लिया गया. बाद में पुलिस वहां पहुंची. महिला को पुलिस के हवाले कर दिया गया. शाहीन बाग पहुंची महिला की पहचान गुंजा कपूर के तौर पर हुई है.

यूट्यूब के राइट-नैरेटिव वेब चैनल में वीडियो बनाती हैं. फेसबुक और ट्विटर पर भी काफी एक्टिव हैं. पीएम नरेंद्र मोदी भी उन्हें फॉलो करते हैं. गुंजा ने पीएम के द्वारा फॉलो करने के ट्वीट को पिन टू टॉप कर रखा है. इसके अलावा उन्होंने अपने कुछ वीडियो में शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन का विरोध भी किया है.

एक वीडियो में कहा- ‘जिस तरीके के सांप्र दायिक नारे प्रोटेस्ट में लग रहे हैं, जिस तरीके से कानून की आड़ में CAA के विरोध में सांप्र दायिक दं’गे भड़’काने का प्रयास विपक्ष कर रहा है वो हम सबको दिख रहा है.

ये नारे कोई सौम्य नारे नहीं हैं. ये हिं’सक हैं, जब-जब ये आकाश में गूंजे हैं, तब-तब धरती रक्त रंजित हुई है. 30 साल पहले ये नारे कश्मीर में गूंजे थे, परिणाम हम सबने देखा था. सैंकड़ों कश्मी’री पंडित अपने घर से विस्था’पित हो गए थे.’

‘बच्चे की मां बच्चे की मौत को शहा’दत का नाम देती है और पिता भारत सरकार को बच्चे की मौत का जिम्मेदार मानते हैं. लेकिन माता और पिता दोनों ही अपनी लापरवाही को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. उस छोटे बच्चे का क्या गुनाह था कि उसे रोज उस दुर्ग’म परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा था.

क्या उसकी मां को जरा भी नहीं लगा कि इस ठंड में बच्चे का स्वास्थ्य खराब हो जाएगा. क्या उनके लिए बच्चे से ज्यादा प्रदर्शन जरूरी था. जब बच्चा नहीं रहा तो शहादत का नाम दे दिया.’

एक वीडियो में दिख रहा है कि गुंजा एक कुर्सी में बैठी हैं और पास में कुछ प्रदर्शन कारी महिलाएं खड़ी हैं. उनसे सवाल कर रही हैं. वीडियो की शुरुआत में कुछ साफ-साफ सुनाई तो नहीं दिया, लेकिन ये समझ आया कि महिलाएं गुंजा से कह रही हैं कि अगर वो नॉर्मली भी आतीं तो उनका स्वागत होता, इज्जत से बात की जाती, नाश्ता कराते, खिलाते. इसी बीच एक महिला ये बताते दिख रही हैं कि गुंजा ने अपना नाम बरखा बताया है.

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