माशा अल्लाह–इस मुस्लिम परिवार ने इस हिन्दू लड़की के साथ किया ऐसा जिसे दुनिया मे कहा -सभी अगर ऐसा–

हरियाणा के पंचकूला में एक मुस्लिम परिवार ने जिस बच्ची को गोद लेकर पाला-पोसा, अब उसकी शादी हिन्दू रीति-रिवाज से करवाई है। सेक्टर-10 के इम्तियाज और शबाना ने करीब 18 साल पहले लक्ष्मी नाम की एक बच्ची को गोद लिया था।खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, इस मुस्लिम दंपती ने लक्ष्मी का बड़े चाव से लालन-पालन किया और पढ़ाया-लिखाया।

जब इसके विवाह के लिए कोई हिन्दू लड़का ढूंढ़ना शुरु किया तो लोगों को यह जानकार हैरानी हुई कि अब तक जिसे वे इम्तियाज और शबाना की बेटी मान कर चल रहे थे, वह न केवल उनकी गोद ली हुई बेटी है, बल्कि उसका ताल्लुक हिन्दू परिवार से है।पंचकूला में सनातन धर्म मंदिर सभा ने इस मामले में मुस्लिम दंपती की मदद की। लक्ष्मी की शादी की तैयारियां की गईं और हिन्दू रीति-रिवाज से उसका विवाह सम्पन्न करवाया गया।

मंदिर में पंडित ने पूरे विधि-विधान से फेरे करवाएससुराल के लिए लक्ष्मी की डोली रवाना करने से पहले सनातन धर्म सभा से जुड़े लोगों ने सुखद जीवन के लिए अपना आशीर्वाद दिया।इस मौके पर लक्ष्मी को कपड़े, बर्तन, सिलाई मशीन और अन्य घरेलू सामान दिया गया। सनातन धर्म सभा की तरफ से ही शादी में बैंड-बाजे की व्यवस्था की गई और बारातियों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया।जिस से वहां पर जमा लोग सभी खुस थे और खूब एक दूसरे के लिए नफरत की आग खत्म करने की बात कर रहे थे

एक मुख्यमंत्री जी ने अभी कुछ दिन ये बात कही थी किअधिकांश राज्यों के मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि सीएए और एनआरसी को लागू नहीं करेंगे। ऐसे में, केन्द्र सरकार को चाहिए कि वह स्वयं ही संविधान की मूल भावना को नष्ट करने वाले कानून और इससे जुड़ी प्रक्रियाओं को वापस ले लेंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में अराजकता और डर की स्थिति बनी हुई है। जनता भली-भांति समझती है कि सीएए और एनआरसी देश के संविधान के खिलाफ हैं।उन्होंने कहा कि एनआरसी के लिए छिययतर हजार करोड़ रुपए खर्च करना और सारे देश की जनता को लाइनों में खड़ा करने का कोई अर्थ नहीं है।

असम में एनआरसी की प्रक्रिया के दौरान गरीब लोगों को, जिसमें सभी धर्म-जातियों के लोग शामिल हैं, नागरिकता सूचियों में नाम दर्ज कराने में कितनी तकलीफें झेलनी पड़ी हैं।उन्होंने कहा कि वहां एनआरसी के लिए सोलह सो करोड़ रुपए खर्च करने के बाद अब राज्य सरकार इसे लागू नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि जो कानून लागू नहीं हो सकता, उसके लिए कवायद क्यों की जा रही है।गहलोत ने धरने में शामिल लोगों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार नागरिकों के बीच भेद करने वाले कानून सीएए और एनआरसी को लागू होने से रोकने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।

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