ज़फरयाब जीलानी की ‘भारत माता’ के सामने दीप ज’लाने की फ़ोटो हुई वायरल, लोगों ने जताई आपत्ति!

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयो”जक रहे मशहूर वकील जफरयाब जिलानी की कुछ तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं. इन तस्वीरों में जफरयाब जिलानी भारत माता की तस्वीर के सामने दीप प्रज्व”लित करते नज़र आ रहे हैं.

राम मन्दिर के शिला”न्यास के फौरन बाद वायरल हुई इन तस्वीरों के कारण लोगों ने जफ”रयाब जिलानी के चरित्र पर ऊँगली उठाना शुरू कर दिया है. सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें बाबरी मस्जिद का सौदा”गर तक बता दिया है.

मुस्लिमों में बड़ा नाम होने तथा बाबरी मस्जिद के वकील होने के कारण उनके द्वारा इस तरह भारत माता की मूर्ती के सामने दीप प्रज्वलित करने से इस तरह की बातों का सामने आना स्वभा”विक भी है.

हालाँ”कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो उनके दीप प्रज्वलित करने को बाबरी मस्जिद से जोड़ कर नही देख रहे। उनका कहना है कि बड़ा नाम होने के कारण किसी भी कार्य”क्रम में मुख्य अतिथि बनने पर यह सब करना पड़ जाता है। इससे किसी के चरित्र का फैसला नही कर सकते.

बता दें कि पिछले कुछ वर्षों से संघ परिवार द्वारा किसी भी कार्यक्रम की शुरु”आत से पहले भारत माता की तस्वीर के सामने दीप प्रज्व”लित करने का सिल”सिला शुरू किया गया था.

जिसके बाद अब अक्सर धार्मिक, सां”स्कृतिक या ‘राष्ट्र’ के नाम पर होने वाले किसी भी कार्य”क्रम में भारत माता की तस्वीर के सामने दीप प्रज्व”लित किया जाने लगा.

हिंदू समुदाय के धार्मिक कार्यक्रम में गणेश की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित किया जाता था, लेकिन अब उसकी जगह आरएसएस द्वारा शुरु की गई ‘परंपरा’ ने ले ली है.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर और उस पर हो रहे बवाल को लेकर हिन्द न्यूज़ ने जफरयाब जिलानी का पक्ष जानने के लिए उनसे बात की तो उन्होंने वायरल तस्वीर की पुष्टि करते हुये बताया कि शमा (दीप) का कोई धर्म नहीं होता इसलिए मुझे इसमें कोई भी आपत्ति जनक बात नहीं लगती.

जफरयाब जिलानी के अनुसार हम एक बहुसांस्कृतिक देश में रहते हैं और भारत माता की तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित करना उसी का हिस्सा है। उन्होंने ये भी कहा कि इस बारे में मैंने पहले उलेमा (मुस्लिम धर्मगुरुओं) से मालूम भी किया था उन्होंने कहा था कि इस में कोई बुराई नहीं है.

जब हिन्द न्यूज़ ने उनसे तस्वीर के सामने दीप जलाने की  बाबत पूछा तो उन्होंने कहा कि तस्वीर पर माल्यार्पण तो पहले ही हो चुका था, मैंने तो सिर्फ उसके सामने रखी मोमबत्ती को रौशन किया, इससे मुझे कोई आपत्ति नहीं, क्योंकि मैंने सिर्फ शमा रौशन की है, वो भी काफी फासले से.

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