कंगना रनौत के ‘इ’स्ला’मी फिल्म इंडस्ट्री’ पर शि’वसे’ना का पलटवार,यँहा लोग प्रतिभा के दम पर सफल हुए हैं ध’र्म के आधार पर नही

मुंबई: शिवसेना (Shivsena vs Kangana Ranaut) ने शनिवार को कहा कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के दम पर सफलता पाई न कि ध’र्म के बल पर। दरअसल कंगना रनौत (Kangana Ranaut news) ने अपने एक ट्वीट में कहा था कि उन्होंने ‘इस्लाम के प्रभुत्व’ वाली फिल्म इंडस्ट्री में अपना जीवन और करियर दांव पर लगाया और रानी लक्ष्मीबाई और छत्रपति शिवाजी महाराज पर फिल्में बनाईं ।

मुंबई
सुशांत सिंह राजपूत की मौ’त के बाद से बॉलिवुड को लेकर चल रहे वि’वा’द पर शि’वसे’ना (Shivsena news) ने फिल्म जगत का पु’रजो’र समर्थन किया है। शि’वसे’ना ने शनिवार को कहा कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की आधारशिला एक मराठी दादासाहेब फाल्के ने रखी थी। फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के दम पर सफलता पाई न कि ध’र्म के बल पर। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे संपादकीय में कंगना रनौत (Kangana Ranaut news) के उस ट्वीट पर निशाना साधा गया है जिसमें उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को ‘इ’स्ला’म के प्रभुत्व’ वाली करार दिया था।

दरअसल कंगना रनौत ने अपने एक ट्वीट में कहा था कि उन्होंने ‘इ’स्ला’म के प्रभुत्व’ वाली फिल्म इंडस्ट्री में अपना जीवन और करियर दां’व पर लगाया और रानी लक्ष्मीबाई और छत्रपति शिवाजी महाराज पर फिल्में बनाईं। संपादकीय में कहा गया कि फाल्के की रखी गई आधारशिला का फल आज पूरे देश से आए कलाकारों को मिल रहा है ।

मुंबई में लोग पहले फु’टपा’थ पर सोते हैं, फिर जुहू-पाली हिल रहने चले जाते हैं’
सामना में कहा गया, ‘मुंबई में इस इंडस्ट्री में अपना भाग्य आजमाने जो आता है वह पहले फुटपाथ पर सोता है और फिर जुहू, पाली हिल और मालाबार हिल में बंगला बनाकर रहने चला जाता है। ये सभी लोग इस शहर और राज्य के हमेशा आभारी रहे हैं जिसने उन्हें उनके सपनों को सच करने का अवसर दिया। उन्होंने मुंबई को कभी धो’खा नहीं दिया और शहर के विकास में अपना योगदान दिया।’

शि’वसे’ना बोली, फिल्म इंडस्ट्री से लाखों लोगों को मिला रोजगार
मुखपत्र में कहा गया, ‘बहुत से कलाकारों को भारत रत्न और निशान ए पा:किस्ता’न से नवाजा गया है।’ संयोग से कई साल पहले जब दिलीप कुमार ने निशान ए पा’किस्ता’न स्वीकार किया था तब शि’वसे’ना ने इसका मुखर होकर वि’रो’ध किया था। संपादकीय में यह भी कहा गया कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री लाखों लोगों को रोजगार देता है। इंडस्ट्री में ‘खा’नों’ के प्रभुत्व पर संपादकीय में कहा गया कि एक समय फिल्म इंडस्ट्री में पंजाबियों और महाराष्ट्रियन लोगों का प्रभुत्व था।

(भाषा से इनपुट्स के साथ)

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