कहानी महान बॉक्सर माइक टायसन की, कैसे जेल में इस्लाम कुबूल कर लिया

वो ‘वाइल्ड’ से थोड़ा ज्यादा था, अपराधी था, लेकिन ज़िन्दगी में उससे सीखने लायक इतनी बातें हैं कि उसका फैन हुआ जा सकता है. 30 जून 1966 के दिन इस ‘Baddest man on the planet’ यानि धरती के इस सबसे बुरे आदमी का न्यूयॉर्क में जन्म हुआ था.

‘होनहार बिरवान के होत चीकने पात’ को सही साबित करने वाला ये लड़का 13 साल की उम्र तक 38 बार गिरफ्तार हो चुका था. बाद में उसने बलात्कार के आरोप में 3 साल की जेल काटी. बॉक्सिंग रिंग में अपने प्रतिद्वंद्वी का कान चबा डाला और साल भर का बैन झेला. उसे बॉक्सिंग रिंग में उतरने वाला अब तक का सबसे क्रूर इंसान माना गया. लेकिन ये तो उसके व्यक्तित्व का महज़ एक पहलू है.

दूसरा पहलू ये है कि पहली बार वो तब गिरफ्तार हुआ था, जब उसने अपने पालतू कबूतर को मारने वाले लड़के का जबड़ा तोड़ दिया था. वो बोलने में हकलाता था और बाकी लड़के उसे चिढ़ाते थे. ऐसे में उसे रोने और शिकायत करने की बजाय उनका दांत तोड़ना ज्यादा बेहतर लगा था. उसकी मां लॉरना ‘सिंगल मदर’ थीं, जिनसे उसके रिश्ते ताउम्र खराब ही रहे.

16 साल की उम्र में उसने जूनियर ओलंपिक में गोल्ड जीता. जूनियर ओलंपिक बॉक्सिंग में सबसे तेज़ – 8 सेकंड में – नॉकआउट का रिकॉर्ड उसी के नाम है. अखबारों ने तब उसे ‘किड डायनामाइट’ नाम दिया था. 18 साल की उम्र में वो प्रोफेशनल बॉक्सिंग में आ गया. शुरुआती 19 फाइट्स नॉकआउट से जीतीं. जीतना तो दूर, उसके आगे तीस सेकंड से ज्यादा टिकना ही किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए बड़ी बात थीं.

1986 में वो ट्रेटर बार्बिक को हराकर 20 साल की उम्र में दुनिया का सबसे युवा हैवीवेट चैंपियन बना. मशहूर हुआ. मशहूर एक्ट्रेस रॉबिन गिबेन्स से शादी की. रॉबिन साल भर के भीतर ही उसकी कमाई आधी से ज्यादा दौलत लेकर उसे छोड़ गई. 1992 में मिस ब्लैक अर्थ के साथ वो तीन दिन होटल के कमरे में रहा और चौथे दिन उसी औरत ने उस पर बलात्कार का आरोप लगा दिया.

6 साल की जेल हुई, लेकिन अच्छे चाल-चलन के चलते 3 साल में ही छूट गया. उसने जेल में इस्लाम कुबूल किया था और मलिक अब्दुल अज़ीज़ नाम पाया था. 1995 में जेल से छूटने के बाद वो फिर से वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बना. फिर से दौलत कमायी. दो साल बाद 1997 में रिंग के भीतर प्रतिद्वंद्वी हॉलीफील्ड का कान चबा लिया और साल भर का बैन झेला. कुल मिलाकर वो अपनी ज़िंदगी के 58 बाउट्स में से सिर्फ 6 हारा. WWF में भी हाथ आजमाया, पर कुछ खास नहीं चला.

उसने 2005 में बॉक्सिंग से रिटायरमेन्ट ले लिया और हॉलीवुड आ गया, जहां उसने Fallen Champ, The Hangover जैसी बहुत सारी सुपरहिट फिल्में दीं. आज वो अपने छोटे से परिवार के साथ ग्लैमर से दूर सुकून भरा जीवन जी रहा है. और हाँ, आज भी वो खूब सारे कबूतर पालता है, जिन्हें अब कोई परेशान नहीं करता.

तो ये सारा कच्चा-चिट्ठा उस आदमी का था जिसे दुनिया मशहूर बॉक्सर माइक टाइसन यानी माइकल जेरार्ड टाइसन के नाम से जानती है. माइक टाइसन वो आदमी है, जिसके अच्छे या बुरे होने को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग मत हैं. माइक की बात आने पर मुझे बरसों पहले पढ़ी ये लाइन ‘A criminal is a victim whose story has not been told’ याद आती है. बाकी असल बात तो ये है कि इंसान अपनी परिस्थितियों का उत्पाद होता है. वो जो है, जैसा है, अपने हालात की वजह से है. ये हालात सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक ही नहीं, आनुवांशिक भी हो सकते हैं.

वरना कौन सी बड़ी बात थी कि माइक के मां-बाप ने साथ में ही उसकी परवरिश की होती, वो कभी किसी को मुक्का ही न मारता, किसी का जबड़ा न तोड़ता, किसी गली-फाइट में इन्वॉल्व न होता, किसी बॉबी स्टुअर्ट नाम के एक्स बॉक्सर की निगाह में न आता, किसी कस डिमाटो नाम के अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर से ट्रेनिंग न पाता, और ये दुनिया किसी माइक टाइसन नाम के महान बॉक्सर को पाने से चूक जाती!

फिर भी आज माइक एक लिविंग लीजेंड हैं. अच्छे-बुरे से अलग वो एक महान व्यक्तित्व है, जिसने ज़िन्दगी के सभी रंग देखे और ज़िन्दादिली की मिसाल बने. मुझे वो इसलिए भी पसंद हैं, क्योंकि उनकी ज़िंदगी संदेश देती है कि नई शुरुआत कभी भी की जा सकती है।

(यह लेख दी लल्लनटॉप के लिये हिमांशु सिंह ने लिखा है. हिमांशु दिल्ली में रहते हैं और सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. हिन्दी साहित्य के विद्यार्थी हैं और प्रतिष्ठित करेंट अफेयर्स टुडे पत्रिका में वरिष्ठ संपादक रह चुके हैं. समसामयिक मुद्दों के साथ-साथ विविध विषयों पर स्वतंत्र लेखन करते हैं.)

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