मध्यप्रदेश: ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद कांग्रेस के इस नेता ने भी छोड़ी पार्टी, बताई ये वजह-

मध्य प्रदेश में बीते दिनों 22 विधायकों के बा’गी हो जाने के चलते इस वक्त का राज्य में सत्तारूढ़ कमलनाथ सरकार सि’या’सी सं’क’ट से गुजर रही है। इन्हीं में से एक बाकी विधायक राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव के बारे में आज हम आपको कुछ खास जानकारी देने जा रहे हैं। 48 वर्षीय राज्यवर्धन सिंह मध्य प्रदेश के धार इलाके की बदनावार विधानसभा सीट से विधायक हैं। राजनीति में आने से पहले राज्यवर्धन सिंह मार्केटिंग मैनेजर रह चुके हैं। दरअसल अपने पिता के अ’पमा’न का ब’द’ला लेने के लिए वह राजनीति में उ’तरे थे और फिर खुद को पूरी तरह से राजनीति के होकर रह गए। आपको बता दें कि राज्यवर्धन सिंह को पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का करीबी माना जाता है!

उनके पिता प्रेम सिंह भी माधवराव सिंधिया के करीबी हुआ करते थे। बताया जाता है कि साल 1990 में राज्यवर्धन सिंह उस समय लुफ्तांसा में मार्केटिंग मैनेजर हुआ करते थे। जब साल 1998 में उनके पिता प्रेम सिंह को कांग्रेस पार्टी ने टिकट देने से म’ना कर दिया था तो अपने पिता के अ’पमा’न का ब’द’ला लेने के लिए राज्यवर्धन ने नौकरी छोड़कर नि’र्दली’य चुनाव लड़ने का फैसला दिया। साल 2018 में राज्यवर्धन तीसरी बार विधायक चुने गए हैं। उन्हें इस बार कांग्रेस सरकार में मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मंत्री पद के लिए उनके नाम की अनदेखी की गई। वहीं राज्यवर्धन सिंह के वि’रो’धी माने जाने वाले उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह, जो कि उम्र में राज्यवर्धन से छोटे हैं, उन्हें मंत्री पद दे दिया गया!

बेंगलुरु से एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दत्तीगांव ने कहा है कि “जो लोग अ’न्या’य को स’हते हैं, वो अ’न्या’य करने वालों से ज्यादा दो’षी होते हैं।” राज्यवर्धन सिंह ने 2018 के चुनाव में 51,506 वोटों से जीत दर्ज की थी,राज्यवर्धन सिंह के अलावा जिन अन्य विधायकों ने अपना इ’स्ती’फा दिया है, उनमें हरदीप डंग, बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंसाना, रणवीर जाटव, कमलेश जाटव, रघुराज कंसाना, मुन्नालाल गोयल, ओपीएस भदौरिया, गिरिराज ढंडोतिया, बृजेन्द्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, जयपाल सिंह, मनोज चौधरी, जसमंत जाटव, रक्षा संतराम सारुनिया का नाम शामिल है!

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