छत नहीं ,बाप का साया नहीं, फिर भी मुस्लिम लड़की ने नहीं हारी हिम्मत, बनी जज

कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तबियत स उछालो यारों । इंसान के पास परेशानी कितनी भी हो लेकिन अगर वो चाहे तो, अपने जज्बे , हिम्मत , कड़ी मेहनत और जज़्बे से दुनिया को जीत सकता है । अगर चाहे तो बड़ी बड़ी से उपलब्धियों को पा सकता है । ऐसे तो आप लोगो ने कई तरह की कहानियां सुनी होगी कि एक गरीब के बेटे या बेटी ने अपनी मेहनत के बल पर देश या परिवार का नाम रोशन किया ।

जो मेहनत करते है, ठान लेते है तो अपनी सफलता तक पहुँच ही जाते है। पानीपत की रहने वाली मुस्लिम परिवार की बेटी रूबी जज बनी है। ये झुग्गी झोपड़ियों में रहती थी। इनका घर एक बार ही नही बल्कि 16 बार उजड़ा है। इनके पिता का साया सर से उठ गया। जीडी रॉड पर अनाजमंडी के पास कुछ घर है वहा पर रूबी का परिवार टूटी फूटी अवस्था में रहकर जैसी तैसी जिंदगी बसर कर रहा था ।

रूबी का सपना था कि वो पढ़ लिखकर अफसर बने, अपने परिवार का नाम रोशन करें, अपने देश का नाम दुनिया मे ऊंचा करें ।चार बहनों में सबसे छोटी रूबी ने अंग्रेजी में एमए किया। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा भी दी,लेकिन सफल नही हुई.दिल्ली यूनिवर्सटी से 2016 में एलएलबी की। साल 2018 में उत्तरप्रदेश और हरियाणा न्यायिक सेवा की परीक्षा में बैठी, सफलता बहुत दूर थी।

इसी बीच 27 अप्रैल, 2019 में उनके घर मे आग लग गई। एक महीने बाद 27 मई को झारखंड न्यायिक सेवा की परीक्षा दी।ऐसे में कई बार रूबी ने फुटपाथ पर बैठकर पढ़ाई की। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास करने के बाद 10 जनवरी 2020 को इंटरव्यू देकर जब लोटी तो मन में सफलता की आस थी। जब इनका परिणाम आया तो रूबी ने 52वी रैंकिंग हासिल की।


जब ये सुबह सोकर उठी तो वाट्सएप पर मैसेज देखा। इनकी आँखे नम हो गई। आखिरकार रूबी ने अपने और परिवार का नाम रोशन कर दिया। इनका परिवार वेस्ट कारोबार में मजदूरी करता है। परिवार की बेटी रूबी ने अपना जज बनने का सपना पूरा कर दिया है। रूबी को सभी लोग बधाई दे रहे है। इतनी ज्यादा मुसीबत होने के बाबजूद भी इन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी भी नही छोड़ा।

दैनिक जागरण से रूबी ने बातचीत करते हुए बताया है कि मेरे वालिद अलाउद्दीन की 2004 में असामयिक मौत हो गई थी। लेकिन मेरी अम्मी जाहिदा बेगम ने 5 बहन भाई को बड़ा किया। माँ ने तंगी झेलकर हर ख्वाइश को पूरी किया।रूबी का कहना है कि भाई मोहम्मद रफी ने हमेशा हौसला बढ़ाया।

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