मु’स्लिम आ’बादी के पहली बार नए आं’क’ड़े आए सा’मने- किसी को नही थी उम्मीद

इंडिया में बढ़ती जनसंख्या से देश मे कई क्षेत्रों में उतार चढ़ाव देखने को मिला है रोजगार भारी मात्रा में इस से प्रभावित हुए है अभी जल्द ही में उत्तर प्रदेश की जनसं”ख्या में भारी चढ़ाव देखने को मिला जो चिंता का विषय है लेकिन इस विषय पर कोई बात नही करना चाहता ।

मुस’-लमानों की कुल आबादी 1952 में 3,58,56.047 थी। यह बढ़ती हुई 1961 में 4,69.98,120 तो 1971 में 6,14,48,696 हो गई। इसके बाद 1981 के जनगणना में देश में मुस-‘लमानों की कुल आबादी 7,75,57,852 थी जो 1991 में 10,25,86,957 हो गई। इसके बाद की जगणना के समय यानी 2001 में देश में 13,81,59,437 मुस’-लमान थे। अंतिम जनगणना यानी 2011 में देश में मुस-‘लमानों की तादाद 17,22,45,158 पाई गई।

लेकिन यह याद रखना होगा कि इस दौरान पूरे देश की ज-नसंख्या निरंतर बढ़ी है। यह 1951 में देश की जनसंख्या 1951 में 36 करोड़ थी तो 2011 में 121 करोड़ हो गई। यानी इस दौरान देश की ज-नसंख्या लगभग लगभग 3 गुणा बढ़ी है। बढ़ती ज-नसख्या हर देश के लिए घातक होती है सरकार को जल्द इस पर फैसला लेना चाहिए ।

वृद्धि दर में कमी – योगी आदि-त्यनाथ इस बात को नजरअंदाज़ कर गए कि मु-सलमानों की जन-संख्या वृद्धि की दर पहले से कम हो रही है, हालाँकि वह अभी भी हि-न्दुओं की ज-नसंख्या वृद्धि दर से ज़्यादा है। जबकि उन्हें आकंड़े देखने चाहिए जिस से वह सही आंकड़े जनता के समक्ष रख सकें ।

एक रिसर्च रिपोर्ट (हिन्दू-मुस-लिम फ़र्टिलिटी डिफ़्रेन्शियल्स: आर. बी. भगत और पुरुजित प्रहराज) के मुताबिक़ 1998-99 में दूसरे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के समय जन-न दर (एक महिला अपने जी-वनकाल में जितने बच्चे पैदा करती है) हि-न्दुओं में 2.8 और मुस-लमानों में 3.6 बच्चा प्रति महिला थी. 2005-06 में हुए तीसरे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (Vol 1, Page 80, Table 4.2) के अनुसार यह घ-ट कर हि-न्दुओं में 2.59 और मुस-लमानों में 3.4 रह गयी थी।

कम होती प्रज-न-न दर – प्रज-न-न दर का मतलब है कोई औ-रत अपने जीवन काल में औसतन कितने बच्चे पै-दा करती है। एनएफएचएस 2005-06 में पाया गया था कि मुस-लमानों की प्रज-न-न दर 3.4 थी जबकि हि-न्दुओं में यह 2.6 बच्चे थी। इस तरह दोनों समु-दा यों के बीच 30.8 प्रतिशत का अंतर पाया गया था। लेकिन 2015-16 के सर्वे में यह अंतर 23.8 प्रतिशत हो गया।

प्रज-न न दरों के अंतर में कमी – चालीस साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि दोनों समुदा यों के बीच प्रजनन दर के अंतर में कमी आई है। आज़ादी के समय मुस लमानों की प्रजनन दर हिन्दुओं के प्रजन न दर से 10 प्रतिशत अधिक थी। यह अंतर 1970 के दशक में बढ़ने लगी कि क्योंकि हिन्दुओं में ग र्भ निरो धक उपाय किए जाने लगे। हि न्दुओं और मुसलमानों के बीच प्रज न न दर में अंतर 1990 के दशक में 30 प्रतिशत था। जनग णना और एनएफएचएस सर्वे दोनों  से ही यह साफ़ है कि हि न्दुओं और मुस लमानों के प्रजनन दर में अंतर यहीं रुक गया.

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