सनसनीखेज – लापरवाही पुलिस की, कोरोना का कलंक ‘तब्लीग जमात’ के माथे पर -NBT

जैसे जैसे दिन बीतते जा रहे हैं देश के हालात खराब होते जा रहे हैं कल कोरोना से रिकॉर्ड 36 मौतों की ख़बर प्रकाश में आयी है, रोजाना 500 से भी ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, हालाँकि अभी 400 से ज्यादा शहर कोरोना से सुरक्षित हैं।

 

लेकिन हालात बहुत नाजुक हैं, जबकि पूरे देश को एकजुट होने की जरूरत है, वहीँ कुछ मीडिया चैनल देश को एक बड़ी तबाही की तरफ ले जा रहे हैं, वर्ग विशेषके खिलाफ देश भर में जहर बो दिया गया है, लेकिन आज सुबह अखबारों में एक चौंकाने वाली ख़बर सामने आयी है, हम NBT की पूरी न्यूज को शब्दस: यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं-

तब्लीग जमात सदस्य

नई दिल्ली : देश में कोरोना फैलाने का ठीकरा भले ही निजामुद्दीन स्थित मरकज के सिर फोड़ा जा रहा हो, लकिन असल जिम्मेदार दिल्ली पुलिस है। उसकी नाक के नीचे ही प्रतिबधं के बावजदू हजारों लोगों का जमावड़ा लगा था। फरवरी में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के दंगे हों या मरकज केस, दोनों ही मामलों में दिल्ली पुलिस फ्लॉप रही है। यही वजह रही कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को दोनों बार खुद मोर्चा संभालना पड़ा।

‘कमिश्नर ने दिए हैं बात लीक नहीं करने के निर्देश’:

दिल्ली पुलिस के एक आला अफसर ने बताया कि कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने नॉर्थ-ईस्ट दंगे और मरकज की जांच समेत सभी संवेदनशील मामलों में कोई भी बात लीक नहीं करने के निर्देश दिए हैं। इन दोनों ही मामलों में पुलिस की लापरवाही से सारी गड़बड़ी हुई है। इसलिए पुलिस के आला अफसर खुलकर कुछ भी बोलने से डर रहे हैं। अफसर ने बताया कि नॉर्थ-ईस्ट के दंगों की वजह से दिल्ली में 1 से 15 मार्च तक धारा 144 पुलिस की तरफ से लगी थी।

इसके बाद दिल्ली सरकार ने सभी समारोह के आयोजन पर रोक लगा रखी थी, तो फिर निजामुद्दीन के मरकज में 15 से 17 मार्च के बीच 15 हजार लोगों का समारोह कैसे हो गया? ‘पुलिस को थी जमावड़े की पूरी जानकारी’ : मरकज से जुड़े एक जमाती ने बताया कि पुलिस को जमावड़े के बारे में पूरी जानकारी थी। निजामुद्दीन थाने के साथ लगती हुई मरकज की दीवार है, इसलिए वहां की हर गतिविधि से पुलिस वाकिफ रहती है।

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स्पेशल ब्रांच की तरफ से एक पुलिसकर्मी हमेशा मरकज की गतिविधियों पर नजर रखता है। विदेशी जमातियों के आने से इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का एक अफसर भी लगातार निगरानी रखता है। ऐसे में पुलिस को मरकज मैनजे मेंट को चेतावनी दनेे की बात लॉकडाउन होने के बाद क्यों याद आई। सूत्रों का कहना है कि इस लापरवाही के लिए पुलिस अफसरों पर गाज गिरने पर विचार चल रहा था, जिसे अब टाल दिया गया है।

 

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के दंगों पर सिर्फ दयालपुर और जाफराबादथाने के एसएचओ को हटाकर बाकी अफसरों को बचा लिया गया। लापरवाही पुलिस की, कोरोना का कलंक मरकज के माथे परमामला पेचीदा होते ही जांच क्राइम ब्रांच को दिल्ली पुलिस से जितने भी मामले कथित रूप से पेचीदा होते हैं, उनकी जाचं क्राइम ब्रांच को सौंप दी जाती है।

 

मरकज मामले में डीसीपी जॉय टिर्की और एसीपी अरविदं कुमार की जाचं टीम अब तक धूल में लट्ठ मार रही है। वह मरकज के मौलाना की लोकेशन तक नहीं पहुचं सकी है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता एमएस रंधावा से संपर्ककिया गया, तो उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। ‘पुलिस-स्पेशल ब्रांच में तालमेल की कमी’ दोनों ही मामलों में पुलिस और स्पेशल ब्रांच में तालमेल की कमी दिखी है।

 

स्पेशल ब्रांच, जो लोकल इनपट ु देने का काम करती है, उसके अफसरों का दावा है कि उन्होंने मरकज में जमातियों की जानकारी लोकल पुलिस को दे दी थी, लेकिन उसने समय पर एक्शन नहीं लिया। ऐसा दावा नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगे के बाद भी स्पेशल ब्रांच ने किया था कि उसने सक्रिय होने की जानकारी लोकल पुलिस को दे दी गई थी।

(नव भारत टाइम्स- 11 अप्रैल 2020: संस्करण में प्रकाशित एक लेख)

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