इ’स्लामो’फो’बिया पर शेहला राशिद ने खोली बॉलीवुड की पोल, कहा- फिल्मों में हमेशा मु’सल’मा’नों को..

साल 2014 के बाद जब से केंद्र की सत्ता में भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा किया है। तब से ही देश के मु’सलमा’नों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है। जैसे वह इस देश के नागरिक नहीं हो जैसा कि हम सब जानते हैं। मोदी सरकार के हिं’दू रा’ष्ट्र के मं’सूबे कामयाब नहीं हो पाएंगे क्योंकि यह देश लो’कतांत्रि’क और ध’र्मनि’रपेक्ष है इस देश के लोगों ने हमेशा धा’र्मि’क एकता की मिसाल पेश की है।

कुछ धा’र्मि’क क’ट्टर’पंथी संगठन हिं’दू मु’स्लि’म के नाम पर लोगों को भड़काने की कोशिशों में जुटे रहते हैं। आजकल दुनिया भर में इ’स्ला’मोफो’बिया नाम का एक नया टर्म बना दिया गया है। इ’स्ला’मोफो’बि’या के तहत इस्लाम को लेकर कई नई तरह की ग’ल’तफ’हमि’यां फैलाई जा रही हैं। भारत हो या फिर दुनिया का कोई अन्य देश मुसलमानों को हर जगह आजकल श’क की नि’गाह से देखा जा रहा है।

इसी कड़ी में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष और युवा नेता शहला राशिद ने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर एक ऐसा ही ट्वीट किया है जो इस बात को दर्शाता है कि भारत जैसे देश में हमेशा मु’सल’मा’नों को कम आंका गया है। शेहला राशि ने अपने ट्वीट में बॉलीवुड का हवाला देते हुए कहा कि आप कोई भी फिल्म उठाकर देख लीजिए।

मु’स’लमा’नों को हमेशा लीड किरदार में तभी रखा जाता है। जब फिल्म आ’तंक’वा’दी या आतंक पर बनाई जा रही हो वरना हर फिल्म में हिं’दू अभिनेता को ही लीड किरदार में देखा गया है। फिर हम आम लोगों को इ’स्ला’मो’फो’बि’क होने पर कैसे ब्लेम कर सकते हैं। फिल्म मिशन कश्मीर से लेकर फैमिली मैन तक देख लीजिए हमेशा अच्छा आदमी एक हिं’दू ही होता है और बु’रा आदमी मु’सल’मा’न।

शेहला राशिद ने अपने ट्वीट में जो सवाल उठाने की कोशिश की है वह बहुत ही अहम है। दरअसल फिल्मों से लोग काफी कुछ सीखते हैं और अगर फिल्मों में हमेशा मु’स्लि’म शख्स के किरदार को बु’रा दिखाया जाएगा तो इसका असर लोगों पर जरूर पड़ेगा हमें अगर बदलाव लाना है तो फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को इसे समझना पड़ेगा कि वह मु’सल’मा’नों को हमेशा बुरे किरदारों में ना दिखाएं।

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