बड़ी खबर-पुजारी को जान पर खेलकर बचाया मुसलमानो ने कहा-हमारी सीने पर

दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान खबर लिखे जाने तक 39 लोगों की मौ,त हो चुकी है. 190 से ज्यादा लोग घायल हैं. मौ,त का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. इस हिंसा में कई लोगों ने अपनों को खोया. कई लोगों के घर, दुकान, गाड़ियां सब जला दिए गए. ‘इंडिया टुडे’ की टीम ने हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया. लोगों से बात की. टीम ने ये जानने की कोशिश की कि हिंसा के दौरान क्या-क्या हुआ.

इस दौरान कुछ ऐसी कहानियां पता चलीं, जो इंसानियत में भरोसे को जिंदा रखती हैं.ज़ाकिर नगर. मुस्लिम बहुल एरिया है. यहां इकलौता शिव मं,दिर है. दिल्ली में हुई हिं,सा के दौरान इस मंदिर के पुजारी डर गए थे. इलाका छोड़कर जाने की सोच रहे थे, लेकिन मुसलमानों ने उन्हें रोका. आश्वासन दिया कि उन्हें कुछ नहीं होगा.जावेद ने कहा-ये मंदिर मेरी पैदाइश से पहले का है. मैंने अपने बुजुर्गों से जाना है. ये 50-60 साल पुराना मं,दिर है. मुस्लिम बहुल एरिया में ये इकलौता मंदि,र है.


इसलिए हम लोगों की एक्स्ट्रा जिम्मेदारी बनती है कि हम लोग अपनी जान पर खेलकर इसे बचाएं. खुदा न खास्ता अगर ऐसी कोई बात होती, तो हम अपनी जान निछावर कर देंगे, इस मं,दिर को बचाने के लिए. जब दिल्ली में बवाल हो रहा था, उस दिन हम पंडितजी से आकर मिले. उन्हें आश्वासन दिया कि आपको घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गोली आप पर चलेगी, तो हमारा सीना आगे पाओगे. पूरा एरिया हमेशा से कॉपरेटिव रहा है. ये दिल्ली के लिए एक मिसाल है कि मुस्लिम बहुल एरिया में भी एक मं,दिर कैसे सही तरीके से ऑपरेट हो सकता है.

पुजारी ने कहा हिंसा के दौरान मुझे डर नहीं लगा, क्योंकि हमने ये महसूस नहीं किया कि हमें डरने की जरूरत है. हमारे जितने भी मुस्लिम भाई हैं, सभी हमेशा प्रेम से ही रहते हैं. कभी किसी ने 18 साल में कुछ कहा नहीं.नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में जो हुआ, वो देखने के बाद डर तो लगता है कि ये माहौल क्यों खराब हो गया. क्यों ऐसा हो रहा है. कौन लोग ऐसा कर रहे हैं. हिंसा के दौरान थोड़ा-बहुत मुझे लग रहा था कि यहां से चले जाना चाहिए. लेकिन यहां पर मलिक इलेक्ट्रिकल है, उनके बेटे हैं जावेद. वो लोगों के साथ मेरे पास आए और कहा कि आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है.


मुस्लिम ने बताया हमने पहले भी सपोर्ट किया था. अब भी हम पंडित जी के साथ हैं. हम अमन चाहते हैं. अपने होते हुए कुछ भी ऐसा नहीं होने देंगे. माहौल खराब हुआ, तो हम इनके यहां गए और कहा कि इंशाअल्लाह, हम आपको कुछ नहीं होने देंगे. पंडित जी घबराए हुए लगे, इसलिए हम पंडित जी के पास गए गए और उनके साथ खड़े रहे.दिल्ली दंगों के दौरान जहां कुछ लोग धर्म के नाम पर एक-दूसरे को निशाना बना रहे थे, एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे, वहां ज़ाकिर नगर का ये मामला आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है.

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