‘ गिरती अर्थव्यवस्था में सिर्फ अंबानी-अडानी ही तरक्की कर रहे बाकी क्यों नहीं?

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए रवीश कुमार ने अफने फेस’बुक पेज पर एख पोस्ट लिखा है। अपने पोस्ट में रवीश कुमार ने सर’कार की चुटकी लेते हुए लिखा है कि इस ढहती अर्थव्य’वस्था में अंबानी और अडानी तर’क़्क़ी की नित नई कहानी लिख रहे हैं।

बाक़ी क्यों नहीं लिख पा रहे हैं?  क्या बाक़ी उद्यो’गपतियों को बिज़नेस करना अब नहीं आता है? या बाक़ी बिज़ने’समैन को चुप रहने का बिज़नेस सीखा दिया गया है? रवीश कुमार ने ब्लूम’बर्ग में छपी एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा कि कैसे टेली’कॉम सेक्टर में 2016 में अंबानी के कदम रखते ही टेली’कॉम सेक्टर के कई खिलाड़ी आउट हो गए।

प्रति’योगिता में टिक नहीं पाए। इस सेक्टर में Duopoly रह गया है। तीसरी कंपनी वोडाफ़ोन अदालत की तरफ़ देखकर सांसें गिन रही है। 

रवीश कुमार ने कहा है कि ऐसे लेख छपने चाहिए  ताकि पाठकों को डिटेल जा’नकारी मिलती। रवीश कुमार ने लिखा-

भा’रत संचार निगम लि’मिटेड वाले जानते होंगे कि एक समय कई हज़ार करोड़ का मु’नाफ़ा कमाने वाली कंपनी कैसे ख़त्म की गई।

उससे कहा गया कि आप 2G से 4G का मुक़ाबला करो। इस फ़ैसले से किसे लाभ हुआ BSNL के लोग जानते थे मगर हि’न्दू मुसल’मान की राज’नीति ने कइयों के विवेक पर गोबर लीप दिया था।

आप यह नहीं पूछ सकते कि एयर’टेल जियो से प्रति’योगिता क्यों नहीं कर पाई लेकिन यह तो पूछ सकते हैं कि BSNL को बर्बाद कैसे और किसके लिए किया गया?

रवीश कुमार ने अपने फेस’बुक पोस्ट में लिखा-  ‘इस ढहती अर्थव्य’वस्था में अंबानी और अडानी तरक़्क़ी की नित नई कहानी लिख रहे हैं।

बाक़ी क्यों नहीं लिख पा रहे हैं?  क्या बाक़ी उद्यो’गपतियों को बिज़नेस करना अब नहीं आता है? या बाक़ी बिज़ने’समैन को चुप रहने का बिज़नेस सीखा दिया गया है?

ये तो वही बता सकते हैं कि 2014 के पहले पत्रिकाओं के कवर पर टाय’कून अफ’लातून बन कर छपा करते थे अब कवर से ग़ायब क्यों हैं? कारकुन( एजेंट) की तरह भी नाम नहीं आता। 

अंबानी और अडानी को एक बिज़’नेस स्कूल खोलना चाहिए। उस स्कूल में उन टायकू’नों को कोर्स कराना चाहिए जिन्हें वे पछाड़ चुके हैं। ताकि वे भी सीख सकें कि अंबानी और अडानी क्यों सफल होते है।

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