Video: त’बलीगी तब’लीगी करने वाला मीडिया अब सच्चाई पर कँहा छि’प गया- रवीश कुमार

नई दिल्ली : अगर न्यूज चैनलों को एक दिन में 24 घंटे की जगह 48 घंटे मिलते तो वो सुशांत सिंह राजपूत के केस को 48 घंटे कवर करते हैं. बाकी घटनाओं के कवरेज गायब हो चुके हैं. पहली बार ऐसा नहीं हुआ है, पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है और आगे भी होगा. 20 मार्च से 25 अप्रैल के उन दिनों में जब न्यूज चैनलों के स्क्रीन पर तब्ली’गी ज’मात की खबरें छाई हुई थीं. जरा सी कोशिश करेंगे तो आप याद करने लगेंगे कि उन खबरों को याद करते हुए आप किस तरह की बात करने लगे थे. उन खबरों ने आप पर क्या असर डाला था ।

अभी 1 दिन पहले ही –
नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने साकेत जिला कोर्ट में ट्रायल का सामना कर रहे तब’लीगी ज’मात से जुड़े बहुत से लोगों को सोमवार (24 अगस्त, 2020) को आरो’पमुक्त कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि उनके खि’लाफ कोई भी प्रथम दृष्टया स’बूत नहीं है। आरो:प’मुक्त किए गए उन लोगों में से दो इंडो’नेशिया से, एक कि,र्गिस्तान से, दो थाई’लैंड से, एक नाइ’जीरिया से, एक कजा’किस्तान से और एक व्यक्ति जॉर्डन से है। आरोपमुक्त किए गए उन लोगों में से दो इं”डोनेशिया से, एक कि’र्गिस्तान से, दो थाईलैंड से, एक नाइ’जीरिया से, एक कजा’किस्तान से और एक व्यक्ति जॉर्डन से है। 8 विदेशियों को आरोपो से बरी किया ।

मार्च महीने में नि’जामु’द्दीन म’रकज के को’रोना हॉ’टस्पॉट के रूप में उभरने के बाद तब’लीगी ज’मात के लोग सुर्खियों में थे। वीजा शर्तों का उल्लंघन करने और मिशनरी गतिविधियों में लिप्त होने और सरकार के को’रोना वा’यरस संक्रमण के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण दिल्ली पुलिस ने 955 विदेशियों को आरोप पत्र सौंपा गया था। इनमें से बहुत से लोगों ने याचिकाएं दायर कीं थी और अपने देश लौट गए थे। हाालंकि 44 लोगों ने दिल्ली में खुद के खिलाफ लगाए आ’रोपों का सामना करने का फैसला लिया था ।

अदालत बाकी के 36 को विदेशी अधिनियम की धारा 14 और आईपीसी की धारा 270 और 271 के तहत के तहत आरोपमुक्त कर चुकी है। हालांकि ये अभी भी महा:मारी अधि’नियिम, आ’पदा प्रबंधन अधिनियम और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत खुद पर लगे आरोपों का सामना कर रहे हैं ।

इधर चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहन कौर ने आठ तब’ली’गियों को आरोपमुक्त करते हुए कहा, ‘संपूर्ण चार्जशीट और संलग्न दस्तावेज उस अवधि के दौरान ना तो उनकी उपस्थिति दिखाते हैं और ना ही उनके मर’कज के कार्यक्रम में भाग लेने के बारे में पता चलता है।’ कोर्ट ने आगे कहा कि जैसा आ’रोप है, मगर यह बताने के लिए रिकॉर्ड में कोई दस्तावेज भी नहीं है कि वह तब’लीग के काम में शामिल प्रतिभागियों में से एक थे ।

कोर्ट ने आगे कहा कि ना तो रजिस्टर की कॉपी जब्त की गई और ना ही रिकॉर्ड पर रखा गया। इसके अलावा ना ही एसडीएम की सूची में ऐसे लोगों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया जो मर’कज से हॉस्पिटल या क्वारंटाइन सेंटर भेजे गए थे। ना उन लोगों की लिस्ट दी गई जो मर’कज का हिस्सा थे और उन्हें को’रोना की पुष्टि हुई।

(जनसत्ता से साभार )

इससे 2 दिन पहले की खबर भी पढ़ें
बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की औरंगाबाद बेंच ने दिल्ली के तब’लीगी ज’मात (Tablighi Jamaat) मामले में देश और विदेश के जमा:तियों के खि’लाफ दर्ज FIR को र’द्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में तब’ली’गी ज’मात को ‘ब’लि का बक’रा’ बनाया गया। कोर्ट ने साथ ही मीडिया को फट’कार लगा’या।

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की औरंगाबाद बेंच ने दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) मामले में देश और विदेश के ज’मातियों के खि:लाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में तब’लीगी जमा’त को ‘ब’लि का ब’करा’ बनाया गया। कोर्ट ने साथ ही मीडिया को फट’कार लगाते हुए कहा कि इन लोगों को ही संक्र’मण का जिम्मेदार बताने का प्रॉ’पेगेंडा चलाया गया। वहीं कोर्ट के इस फैसले के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने बी’जेपी पर नि’शाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस प्रॉपेगेंडा से मु’स्लिमों को न’फरत और हिं’सा का शि’कार होना पड़ा।

कोर्ट ने शनिवार को मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘दिल्ली के मर’कज में आए विदेशी लोगों के खि’लाफ प्रिं’ट और इ’लेक्ट्रॉनिक मी’डिया में बड़ा प्रॉपेगेंडा चलाया गया। ऐसा मा’हौल बनाने की कोशिश की गई, जिसमें भारत में फैले Covid-19 सं’क्रम’ण का जिम्मे’दार इन विदेशी लोगों को ही बनाने की कोशिश की गई। त’बलीगी ज’मात को ब’लि का ब’करा बनाया गया।’

हाई कोर्ट बेंच ने कहा, ‘भारत में सं’क्रमण के ताजे आंकड़े दर्शाते हैं कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ ऐसे ऐक्शन नहीं लिए जाने चाहिए थे। विदेशियों के खिलाफ जो ऐक्शन लिया गया, उस पर पश्चाचाताप करने और क्षतिपूर्ति के लिए पॉजिटिव कदम उठाए जाने की जरूरत है।’

वहीं हैदराबाद से सांसद और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कोर्ट के इस फैसले की सराहना करते हुए इसे सही समय पर दिया गया फैसला करार दिया। ओवैसी ने ट्वीट कर कहा, ‘पूरी जिम्मेदारी से बीजेपी को बचाने के लिए मीडिया ने तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया। इस पूरे प्रॉ’पेगेंडा से देशभर में मु’स्लिमों को न’फरत और हिं’सा का शि’कार होना पड़ा।’

(नवभारत टाइम्स से साभार)

Leave a Reply

Your email address will not be published.