शाहीन बाग में बैठी हमारी बहनों ने राहत की सांस ली कहा,हम अकेले—-

दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच सभी धर्म के लोगों ने पूजा-पाठ और प्रार्थना की. हिंदू धर्म के संत युवराज ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए हम लोग ये कार्यक्रम कर रहे हैं.दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ बीते 54 दिनों से प्रदर्शन जारी है. इस बीच 6 जनवरी को वहां एक अलग ही नजारा देखने को मिला.

यहां सभी संप्रदाय के लोगों ने अपने-अपने धर्म के मुताबिक पूजा-पाठ और प्रार्थना की. इसमें सभी हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के लोगों ने हिस्सा लिया.इस कार्यक्रम का मकसद हाल में देश में फैले डर और हिंसा के माहौल को खत्म कर एकजुटता का संदेश देना था. प्रदर्शन में शामिल हुए लोगों ने कहा कि देश को बांटने की कोशिश करने वालों के खिलाफ हम सभी एक साथ खड़े हैं.

कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम धर्म के सुल्तान, सरदार की पोशाक में नजर आए. इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कपड़ों से पहचानने की बात करते हैं, तो मैं उनको ये बताना चाहता हूं कि मुझे पहचानें कि मैं किस धर्म से हूं. उन्होंने कहा कि हमारे देश को बांटने की कोशिश ना करें, हम सब एक हैं और एक साथ रहेंगे.हिंदू धर्म के संत युवराज ने कहा, ‘देश की एकता और अखंडता के लिए हम लोग ये कार्यक्रम कर रहे हैं. सभी धर्मों की यहां एकता है

. शाहीन बाग को कोई ये ना समझे कि यहां सिर्फ मुस्लिम लोगों का धरना है. यहां सिख समुदाय गुरबाणी कर रहे हैं. ईसाई लोग भी बाइबिल का पाठ कर रहे हैं. मुस्लिम समुदाय कुरान की आयत पढ़ रहे हैं. मैं हिंदुओं का संत होकर हवन कर रहा हूं. इस हवन का आयोजन भी सभी धर्मों के लोगों ने मिलकर किया है.’ईसाई धर्म के अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने कहा, ‘इस आयोजन का किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. सरकार द्वारा लाया गया नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) मुस्लिम समाज के लोगों के खिलाफ है.’इसका पूरे देश के भक्त इसका विरोध कर रहे है ।लेकिन ये सब जुल्म ज्यादा टाइम नही चलने वाले है कभी तो ठीक होगा सब कुछ ।

इसलिए सभी भाइयो से निवेदन है कि इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे जिससे ये पोस्ट भीम आर्मी के चंद्र शेखर आज़ाद के पास पहुंच जाए और इन दलित भाइयो की मदद के लिए आगे आये और इन सब को सबक सिखा सके क्योंक़ी ये बेचारे बहुत परेशान हैमुसलमान और दलित ये बड़े लोग एक ही समान मानते आए है क्योंकि मुसलमान और दलित पर अब कही जुल्म होता है तो वहाँ की पु,लिस और नेता भी इन्ही का साथ देते है और था,नों से वापस भेज दिए जाते है फिर उसके बाद ये बेचारे फिर भी उस बात को खत्म करने के बारे में सोचते है और घर बैठ जाते है ये सोच कर की कभी तो अच्छा होगा लेकिन अच्छा नही होता उसके बाद फिर से जुल्म करते है

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