शाहीन बाग का आज सब्र खत्म आ रहा है सबसे बड़ा फैशला -आज को,र्ट में सुनवाई के —

इस सुनवाई के दौरान शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी महिलाएं भी अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रही हैं. इसके लिए लीगल पैनल होगा, जो दादियों के साथ पेश होगा.नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ शाहीन बाग में प्रदर्शन जारी है. विरोध प्रदर्शन को खत्म कराने और कालिंदी कुंज-शाहिन बाग सड़क को खुलवाने की कई बार नाकाम कोशिश की गई.

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा. इस मामले में कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार और पु,लिस से जवाब मांगा था.सूत्रों के मुताबिक, शाहीन बाग प्रदर्शन को लेकर आज केंद्र, दिल्ली सरकार और पु,लिस आज अपना जवाब दाखिल कर सकती है. वहीं, अब इस सुनवाई के दौरान शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी महिलाएं भी अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रही हैं. रविवार को अमित शाह से मिले थे

शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के लिए पैदल मार्च निकालने के लिए जुटे थे, लेकिन लोगों को पुलि,स ने बीच में ही रोक दिया.प्रदर्शन में वॉलंटियर की भूमिका निभा रहे सोनू वारसी ने कहा कि जैसे शाहीन बाग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है और शाहीन बाग की तरफ से कोई पार्टी नहीं है. महमूद प्राचा अपने आपको लीगल अथॉरिटी बनाकर पेश कर रहे हैं, जो कि गलत है. न ही उनके पास यहां का वकालतनामा है और न ही अन्य कुछ. यहां जो मुख्य चेहरा है, वो हैं

यहां की महिलाएं. हम सुप्रीम कोर्ट में भी महिलाओं को आगे रखेंगे, जिनमें से चुनिंदा दादियां यानी दबंग दादियां होंगी.सोनू वारसी ने कहा कि शाहीन बाग ने तय किया है कि अब हम अपना लीगल पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे. इसके लिए तैयारी की जा रही है, जो भी हमारा लीगल पैनल होगा, दादियों के साथ पेश होगा. फिलहाल सभी प्रक्रियाओं पर काम किया जा रहा है और जल्द ही इसकी जानकारी दी जाएगी. वकील अनस तनवीर सिद्दीकी शाहीन बाग की तरफ से अपना पक्ष रखेंगे.

शाहीन बाग के प्रद,र्शनकारी चोंसठ दिन से धरने पर बैठे हैं और हर रोज यही कसम खा रहे हैं कि जब तक नागरिकता कानून वापस नहीं होगा, तब तक वो धरने से हटेंगे नहीं. जब तक एनपीआर लागू ना करने और एनआरसी ना लाने पर मोदी सरकार साफ भरोसा नहीं देती, तब तक वो धरने से नहीं हटेंगे, लेकिन सरकार भी पहले दिन से ही डटी हुई है.रविवार को तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से कह भी कह दिया कि अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हो या फिर नागरिकता कानून, दुनिया भर के दबाव के बावजूद वो इन फैसलों पर कायम हैं और कायम रहेंगे.

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