सांड के अंतिम संस्कार में हज़ारों लोग पहुंचे, सोशल डिस्टेंसिंग की टांय-टांय फुस्स

नई दिल्ली : देश में लॉकडाउन चल रहा है. कोरोना के संक्रमण को लेकर सरकार लोगों से घर में रहने की अपील कर रही है. सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी में घर से बाहर निकलने की छूट दी गई है. लेकिन तमिलनाडु के मुदुवरपट्टी गांव में हज़ारों लोग जमा हुए. क्यों? जल्लीकट्टू सांड के अंतिम संस्कार के लिए ।

इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार शिव अरूर का यह विडियो ट्वीट देखिए।

घटना को लेकर जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं. 15 अप्रैल को डीएम टीजी विनय ने बताया कि सांड के अंतिम संस्कार में शामिल हुए लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है. 3000 केस दर्ज किए गए हैं. फोटो और विडियो के आधार पर लोगों को पकड़ा जाएगा ।

तमिलनाडु भारत के सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित राज्यों में से है. राज्य में कोरोना के 1242 केस देखे गए हैं. 118 लोग चंगे हो गए हैं. 14 लोगों की मौत हो गई है. भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 12 हज़ार के पार पहुंच चुकी है.

जाते जाते जल्लीकट्टू समझ लीजिए

जल्लीकट्टू बहुत पुराना खेल है. इसमें सांड से कुश्ती की जाती है. उसे काबू करने वाला विजेता माना जाता है. जीतने वाले के लिए ये उसकी ताकत का सर्टिफिकेट होता है. देखने वालों को इसमें मनोरंजन मिलता है. खेल को और उत्तेजक मनाने के लिए सांड को नशा दिया जाता है. शराब, ड्रग्स, सब. उससे भी नहीं संतुष्ट होते हैं, तो सांड को चोट पहुंचाते हैं. ताकि वो और भड़के. इतने भड़के हुए और मजबूत सांड पर काबू पाने वाला ‘असली मर्द’ माना जाता है. जानवरों की परवाह करने वाले कुछ संगठन इस खेल पर बैन लगाने की मांग करने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. कोर्ट ने बैन लगा भी दिया था. तमिलनाडु के लोग नहीं माने मगर. सड़कों पर उतर आए. हिंसा होने लगी. जल्लीकट्टू मरने-मारने का सवाल बन गया.

ये संस्कृति और आस्था का सवाल बन गया. कमल हसन और रजनीकांत जैसे तमिल सुपरस्टार्स ने भी जल्लीकट्टू का समर्थन किया था. स्थितियां इतनी बिगड़ गईं कि जल्लीकट्टू को फिर हरी झंडी मिल गई।
(दा लल्लनटॉप से साभार)

Leave a Reply

Your email address will not be published.