प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई एक रुपये के जुर्माने की स’ज़ा सुनाई

सुप्रीम कोर्ट ने बड़े वकीलों में से एक Prashant Bhushan को अवमानना मामले में दोषी ठहराने के बाद एक महज़ 1₹ की सज़ा सुनाई है. जुर्माना नहीं दिए जाने की स्थिति में उन्हें तीन महीने जेल की सजा हो सकती है और तीन साल के लिए क़ानून की Practice पर भी रोक लगाई जा सकती है.

Supreme Court ने सोमवार को अपना Order सुनाते हुए कहा कि Court का फ़ैसला किसी Publication या Media में आए विचारों से प्रभावित नहीं हो सकता. Court ने कहा कोर्ट के विचार किए जाने से पहले ही Prashant Bhushan के Press Conference को दिए बयान कार्यवाही को प्रभावित करने वाले थे. Supreme Court ने Prashant Bhushan के दो Tweets को अदालत की अवमानना के लिए ज़िम्मेदार माना था.

कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा कि जनवरी 2018 में की गई Supreme Court के चार Judges की Press Conference भी ग़लत थी. Judges को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अपेक्षा नहीं होती है.

Supreme Court ने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी है लेकिन दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान करना चाहिए. अदालत ने Prashant Bhushan के Tweets का संज्ञान लेते हुए उन्हें Chief Justice of India S.A. Bobde और सुप्रीम कोर्ट की आलो”चना करने का दो’षी क़रार देने के बाद उन पर फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.

Prashant Bhushan ने यह कहते हुए अदालत से माफ़ी मांगने या अपनी टिप्पणी वापस लेने से इनकार कर दिया था. Supreme Court के सामने प्रशांत भूषण के वकील ने तर्क दिया था कि अदालत को अपनी आलोचना स्वीकार करनी चाहिए.

वहीं Attorney General K K Venugopal ने Supreme Court से Prashan Bhushan को स’ज़ा नहीं देने की अपील की थी. मगर अवमानना मामले के तहत कार्रवाई करने की वजह को लेकर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जज अपना पक्ष रखने के लिए Media News Channel का सहारा नहीं ले सकते.

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