जान बूझकर तब्लीग जमात को बनाया गया बली का बकरा – बॉम्बे हाईकोर्ट

मुम्बई। कोरोना महामारी अबतक लाखो इंसानों को लील चुकी है, और अभी तक इस बीमारी का कोई पेटेंट इलाज नही मिल पाया है, हालाँकि इस महामारी ने फिजिकली ही नहीं मेंटली भी लोगों को आवश्यकता से अधिक नुकसान पहुंचाया है, समुदाय विशेष के लोगों पर इस महामारी को फैलाने के अनर्गल आरोप लगाए गए।

 

इस बीमारी द्वारा देश की अखंडता एकता को भी तोड़ने का प्रयास किया गया। कोरोना ने यूँ तो लाखों घर बर्बाद कर दिए हैं , सैंकड़ो देशों की अर्थव्यवस्था बर्बादी के कागार पर है, बहुत सारी राजनितिक सत्ताओं का तख्ता पलट हो सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा मानसिक तौर पर नुक्सान उठाने वाला संगठन है तब्लीग जमात जिसपर देश के संगठन विशेष के लोगों ने जमकर आरोप लगाये और गलत सलत बयानबाजी करके सामजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया।

तब्लीग जमात को इस महामारी के फैलाने दोषी करार दिया गया, कई नेताओं ने संगठन के प्रमुख “मौलाना साद” को जान से मारने पर इनाम तक रख दिया, देश की मीडिया ने भी इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया , जब लोगों स्वास्थ्य एवं अस्पतालों की तैयारी का समय था भारतीय मीडिया स्टूडियो में तब्लीग जमात को जमींदोज करने पर उतारू था, और बेवजह की डिबेट्स करा रहा था।

अब ऐसे में बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा बयान आ गया है, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि जान बूझकर ‘तब्लीग जमात’ को बलि का बकरा बनाया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट का बयान निम्नलिखित है जिसका हिंदी में अनुवाद कर रहे है।

कोर्ट ने कहा ” जब महामारी या विपत्ति आती है तो खुदके बचाव के लिए एक राजनीतिक संगठन बलि का बकरा ढूंढने की कोशिश करती है। और हालात बताते हैं और इस बात की संभावना है कि इन विदेशियों को बलि का बकरा बनाने के लिए चुना गया था।

उपरोक्त परिस्थितियों और भारत में संक्रमण के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान याचिकाकर्ताओं के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी। अब विदेशियों के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के बारे में पश्चाताप करने और इस तरह की कार्रवाई से हुए नुकसान की मरम्मत के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाने के लिए ये सही समय है।”

बॉम्बे हाईकोर्ट के इस बयान के बाद लोग इस कटिंग को जमकर शेयर कर रहे हैं लेकिन स्टूडियो में बैठे पत्रकारों की नज़र में अभी तक इसपर कोई एहमियत नही दी गयी न ही स्टूडियो द्वारा इस बयान को दुनिया तक पहुंचाकर तब्लीग जमात की धूमिल छवि को फिर से उजागर करने की कोशिश की जा रही है।

अगर आप भी इस सच से मुंह मोड़ना चाहते हैं तो इस खबर को पढ़कर इग्नोर कर सकते हैं, और यदि आप चाहते हैं कि हाईकोर्ट का ये सन्देश दुनिया के समस्त नफरत पसन्द लोगों तक पहुंचे तो इस लिंक को कॉपी करके शेयर कर सकते हैं, ये सब आपके ऊपर निर्भर है।

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