बड़ी खबर- तारिक़ फतह झूटी खबर फैलाने में आ गए बड़ी मुसीबत में हो गी बड़ी कारवाई

नई दिल्ली :तारिक फ़तह सोशल मीडिया में सक्रिय एक प्रमुख नाम हैं ।इनका काम विशेष रूप से भारतीय मुसलमानों पर निशाना साधना है और गलत जानकारियां शेयर करना । इससे भी अधिक चिंता की बात ये है कि भ्रामक सूचनाओं की सच्चाई बताए जाने के बावजूद अपना ट्वीट डिलीट नहीं करते हैं।कुछ दिन पहले फ़तह ने बॉलीवुड गाने पर डांस करते बुर्का पहने लोगों का एक वीडियो ट्वीट किया था।

उन्होंने इसके साथ सवाल किया – “क्या कोई पुष्टि कर सकता है कि ये वीडियो #ShaheenBagh में #CAA_NRCProtests का है या नहीं” ? वीडियो में जो कुछ था उस से पता चलता है कि ये नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ शाहीन बाग में चल रहे विरोध प्रदर्शन का नहीं है।

 

मज़ेदार बात ये है कि तीन साल पहले ये वीडियो फ़तह ने एक नहीं बल्कि 2-2 बार ट्वीट किया था। जब उन्हें आगाह किया गया, तो फ़तह ने चुपचाप अगस्त 2017 का अपना ट्वीट डिलीट कर दिया था ।

इसी तरह एक वीडियो में कोलकाता को लेकर उन्होंने झू’ठी खबर फ़ैलाने की कोशिश की लेकिन इस बार वह बच नहीं पाए। इस वीडियो पर कोलकाता पुलिस सक्रिय हो गई और वीडियो की जांच पड़ताल करने के बाद तारिक़ फतह को आड़े हाथों लिया है। इस वीडियो में तारिक़ फतह ने लिखा है “ये कराची ,कश्मीर और केरला नहीं है ये मुसलमान जो इस्लाम ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे हैं ये ममता बनर्जी का शहर कोलकाता हैं”।

इस ट्वीट को कोलकाता पुलिस ने झूट बताते हुए लिखा #फाकनवसलेरट बांग्लादेश की एक वीडियो क्लिप को कोलकाता से होने का झू’ठा दावा किया जा रहा है। ये झू’ठी खबर है कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी ।

बता दें की तारिक फ़तह इस्लाम के मुखर आलोचक हैं और अक्सर मुस्लिम समुदाय के प्रति नफ़र’त फैलते रहते हैं। जैसा कि इस ट्वीट में देख सकते है, वह दुनिया भर के मुसलमानों, खासकर भारतीय मुसलमानों को बदनाम करने के लिए घटनाओं को लगातार ग़लत तरीके से पेश करते रहे हैं। वह अपनी बात मनवाने के लिए बार-बार ऐसी ग़लत सूचनाओं का समर्थन करते हैं, जिनकी तबीयत सांप्रदा’यिक होती है।यहां ये बताना भी ज़रूरी है कि तारिक़ फ़तह के लगातार ग़लत सूचनाओं को अपना हथिया’र बनाने के पीछे ट्विटर की विफ़’लता का भी हाथ है। ट्विटर फ़िलहाल अपने प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसी बातों को कंट्रोल नहीं कर पा रहा है जो दुनिया की तमाम लोकतांत्रिक इकाइयों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती हैं।

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