तेरहवीं में शामिल थे 1500 से ज्यादा लोग, डेढ़ दर्जन कोरोना संक्रमित हुए

मध्यप्रदेश के मुरैना में एक शख्स की मां का निधन हो गया था, मृतक का बेटा दुबई में रहता था। वह वहां से 17 मार्च को आया और उसने आकर 20 मार्च को तेरहवीं भोज का आयोजन किया जिसमें लगभग 1500 लोगों ने खाना खाया था.

फिलहाल उसके करीबी 22 रिश्तेदारों के सैंपल भेजे गये थे, जिसमें 8 महिलाएं तथा 2 पुरूष के सैंपल पॉजिटिव मिले हैं. अब इसे क्या कहोगे? क्या इसे कोरोना की जिहाद अथवा कोरोना बम की तर्ज़ पर ही कोरोना भोज कहा जाएगा? क्योंकि मीडिया ने जिस तरह मुसलमानों को कोरोना बम बनाया है क्या इस तेरहवीं के आयोजन को भी कोरोना भोजन बनाया जाएगा?

नहीं ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए और जो ऐसा कहे तो समझ लीजिए वह कुंठित है, जाहिल है, आतंकी है, ज़हरीला है। यह सरकार और प्रशासन की नाकामी है, लिहाज़ा सवाल भी उन्ही से पूछा जाना चाहिए। ऐसा कौन आदमी होगा जो खुद के बीमार होने की कामना करे? क्या ऐसा कोई कर सकता है? कोरोना ग्रस्त तो खुद पीडित है उसके साथ उसकी धार्मिक पहचान को निशाना बनाना कोरोना से भी अधिक ख़तरनाक है।

सवाल सरकार से किया जाए, क्योंकि जिस रोज़ 20 मार्च को मुरैना में तेरहवीं का आयोजन किया जा रहा था, उस रोज़ सरकार क्या कर रही थी? जवाब है उस रोज़ मध्यप्रदेश की मौजूदा सरकार इस बात का जश्न मना रही थी कि उसने मध्यप्रदेश में फिर से कमल खिला दिया, धन, बल, छल के सहारे उसने कांग्रेस के गद्दारों को अपने साथ मिलाकर कमलनाथ से इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। इसलिए जनता की फिक्र किसे रही होगी? प्रशासन को? भाजपा को? या कांग्रेस को ? जो अपने पास से सत्ता के चले जाने के मातम में डूबी थी?

जवाब है किसी को नहीं। उन्हें भी नहीं जो इस आयोजन मे शामिल हुए थे। अब देखना यह है कि टीवी का बौद्धिक आतंकवादी क्या मुरैना का भी इसी तरह मीडिया ट्रायल करेगा जैसा मरकज़ का किया है।

*Wasim Akram Tyagi✍✍*

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